हमारे आयोजन

एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी :राष्ट्र निर्माण में हिंदी की भूमिका एवम् शिक्षक प्रकोष्ठ स्मारिका का लोकार्पण ।

संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र और हिन्दुस्तानी भाषा अकादमी के सौजन्य से ,20 मई को नई दिल्ली में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी 'राष्ट्र निर्माण में हिंदी की भूमिका' आयोजित की गई। यह गोष्ठी सुबह १० बजे से संध्याकाल, छह बजे तक के चार सत्रों में हिंदी के विविध आयामों को समेटे हुई थी। इस सुअवसर पर देश के ख्यातिलब्ध वरिष्ठ साहित्यकार उपस्थित थे । समारोह का स्वागत वक्तव्य डोक सच्चिदानंद जोशी, सदस्य सचिव, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र ने दिया । मुख्य विद्वत्जनों में अतिथि वक्ता इस प्रकार थे-

१. प्रो. गिरीश्वर मिश्र,
कुलपति, महात्मा गांधी अंतराष्ट्रीय विश्वविद्यालय, वर्धा

२. श्री अतुल कोठारी
शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, दिल्ली

३. श्री राहुल देव
वरिष्ठ पत्रकार

४. सुश्री निधि कुलपति,
एन डी टी वी

५. प्रो. अवनीश कुमार
निदेशक, केंद्रीय हिंदी निदेशालय एवम अध्यक्ष वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग

श्री सुधीश पचौरी,
सुविख्यात पत्रकार

२. श्री अतुल कोठारी
शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, दिल्ली

२. श्री अतुल कोठारी
शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, दिल्ली

७. डॉ प्रमोद तिवारी,
गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय

८. प्रो. नंद किशोर पांडेय
निदेशक, केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा

९. प्रो. राम मोहन पाठक,
हिंदी सेवी

११. डॉ अशोक चक्रधर
हिंदी के विद्वान, कवि, लेखक,निर्देशक, अभिनेता, नाटककर्मी ।

१२. डॉ वेद प्रताप वैदिक
वरिष्ठ पत्रकार और हिंदी सेवी

१३. श्री अच्युतानंद मिश्र
पत्रकार एवम पूर्व कुलपति, माखन लाल चतुर्वेदी पत्रिकारिता बिश्वविद्यालय

१४. श्रीमती चित्रा मुदगल
वरिष्ठ कथा लेखिका एवं हिंदी सेवी

१५. पद्मश्री डॉ नरेंद्र कोहली,
सुविख्यात लेखक

१८. श्री विश्वनाथ प्रसाद तिवारी
साहित्यकार एवं पूर्व अध्यक्ष, साहित्य अकादमी।

इस अवसर पर हिन्दुस्तानी भाषा अकादमी के शिक्षक प्रकोष्ठ की स्मारिका का लोकार्पण भी हुआ ।

वाराणसी व्यंग्य उत्सव -2018

हिन्दुस्तानी भाषा अकादमी, दिल्ली और प्रगतिशील लेखक संघ, वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में 'वाराणसी व्यंग्योत्सव' - 2018' का बेहद शानदार आयोजन रामछाटपार शिल्प न्यास, सामने घाट, बीएचयू, वाराणसी के सभागार में दिनांक 19 मई 2018 को किया गया। यह आयोजन तीन सत्रों में सम्पन्न हुआ।इस आयोजन में देशभर से पधारे जाने-माने व्यंग्यकारों ने सक्रिय भागीदारी की।

आयोजन के प्रथम सत्र में डॉ. रमेश तिवारी द्वारा संपादित और हिंदी साहित्य निकेतन द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'व्यंग्य सप्तक' का लोकार्पण हुआ और पुस्तक पर चर्चा की गई।

वाराणसी व्यंग्योत्सव - 2018 के मुख्य आयोजक और हिंदुस्तानी भाषा अकादमी, दिल्ली के अध्यक्ष श्री सुधाकर पाठक ने अपने वक्तव्य द्वारा सभी उपस्थित विद्वानों, श्रोताओं का स्वागत किया। लोकार्पित पुस्तक के संपादक डॉ. रमेश तिवारी और सम्मिलित लेखकों को साधुवाद देते हुए आगे भी बेहतर लेखन के लिए शुभकामनाएं दीं। इन्होंने व्यंग्य के साथ-साथ भाषाओं पर ध्यान देने की बात पर जोर देते हुए यह चिन्ता व्यक्त की कि भाषाओं की दृढ़ता से ही साहित्य और उसकी विधाओं की दृढ़ता सम्भव हो सकती है।विशिष्ट वक्ताओं में डॉ. संतोष भदौरिया ने जोर देकर कहा कि व्यंग्य करना असहमत होना है।व्यंग्य आपकी पक्षधरता तय करता है। डॉ. प्रभाकर सिंह ने कहा कि व्यंग्य का लोक से गहरा रिश्ता होता है, इसीलिए व्यंग्य में लोक संवेदनाओं के स्वर परिलक्षित होते हैं। गाजियाबाद, उ.प्र. से पधारे वरिष्ठ व्यंग्यकार श्री श्रवण कुमार उमर्लिया ने व्यंग्य सप्तक में संकलित रचनाओं की गुणवत्ता पर प्रकाश डालते हुए यह संदेश दिया कि व्यंग्य की गुणवत्ता से कभी समझौता नहीं होना चाहिए। इस प्रकार के कार्यों के लिए जो दृष्टि अपेक्षित है, वह डॉ. रमेश तिवारी की संपादन कला में भली-भांति अनुस्यूत है। आज ऐसे अनेक ईमानदार और महत्वपूर्ण प्रयासों की आवश्यकता है। इन सबके लिए सूक्ष्म दृष्टि की जरूरत है। डॉ. तिवारी और सभी सम्मिलित रचनाकारों को उर्मलिया जी ने शुभकामनाएं भी ज्ञापित कीं। दिल्ली से पधारे 'हिंदी व्यंग्य का इतिहास' के लेखक और व्यंग्यालोचक श्री सुभाष चंदर के अनुसार हमारे यहाँ धार्मिक स्थितियों पर व्यंग्य का अभाव है। अपने संक्षिप्त परंतु महत्वपूर्ण वक्तव्य में सुभाष चंदर ने सभी सम्मिलित रचनाकारों की लेखन शैली व क्षमताओं पर भी प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता के रुप में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रो. राजकुमार ने कहा कि 'व्यंग्य और हास्य की विभाजन रेखा तय करना सम्भव नहीं हो पाता और व्यंग्य के लिए सृजनात्मक भाषा का होना जरुरी है । इस सत्र की अध्यक्षता करते हुए काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कला संकाय के पूर्व डीन कुमार पंकज ने कहा 'व्यंग्य के भीतर की उक्तियाँ देशज और तद्भव में होने के कारण व्यंग्य रचना का अनुवाद सम्भव नहीं । व्यंग्य सप्तक पर अपनी बात रखते हुए डॉ. कुमार पंकज ने संपादक डॉ. रमेश तिवारी और सभी सम्मिलित रचनाकारों को बधाई देते हुए कहा कि अज्ञेय ने भी जब तारसप्तक का संपादन किया तो उसमें खुद को सम्मिलित करने का लोभ संवरण नहीं कर पाए। इस दृष्टि से डॉ. तिवारी यदि व्यंग्य नहीं लिखते हों, तब तो ठीक है किन्तु यदि ये व्यंग्य लिखते हैं और उसके बावजूद ऐसे संग्रह में स्वयं को सम्मिलित करने के लोभ-मोह से बचे रह सके हैं, तो इनकी निस्पृहता की मैं दाद देता हूँ। बड़ी-बड़ी हस्तियों के लिए भी ऐसा कर पाना अत्यंत मुश्किल होता है जिसे डॉ. रमेश तिवारी ने सहजता संपन्न कर डाला है।

द्वितीय सत्र में 'समकालीन परिदृश्य और व्यंग्य की चुनौतियाँ' विषय पर विमर्श का आयोजन हुआ जिसमें अध्यक्षता करते हुए काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के भूतपूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो.बलिराज पाण्डेय ने कहा कि 'सबसे सटीक व्यंग्यकार वह हो सकता है जो न सिर्फ राजनीति, समाज आदि पर व्यंग्य करे बल्कि अपने पर भी व्यंग्य करने में सफल हो सके।

विशिष्ट वक्ताओं में डॉ. गया सिंह ने कहा कि व्यंग्य को एक अलग विधा में लें तभी उसका महत्व समझ में आयेगा।

श्री सुधाकर पाठक ने कहा कि जहाँ निराशा शासन-प्रशासन की तरफ से बढ़ जाये वहाँ हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी बढ़ जाती है,पाठक वर्ग पैदा करना भी साहित्य और भाषा का चिन्तनबिंदु होना चाहिए।

इस सत्र का संचालन दिल्ली से पधारे डॉ. रमेश तिवारी और धन्यवाद डॉ.नीरज खरे द्वारा किया गया।

तृतीय सत्र में रचनापाठ का आयोजन किया गया। इस सत्र की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध कथाकार डॉ. काशीनाथ सिंह द्वारा की गयी।काशीनाथ जी ने अपनी रचना-पाठ के साथ हरिशंकर परसाई की सूक्तियों का भी पाठ किया, उन्होंने कहा कि व्यंग्य एक स्वतंत्र विधा है। आमंत्रित रचनाकारों में अलकबीर (वाराणसी), अलंकार रस्तोगी(लखनऊ), संतोष त्रिवेदी(दिल्ली), अनूपमणि त्रिपाठी (लखनऊ), शशिकांत सिंह'शशि' (नांदेड़, महाराष्ट्र), रमेश तिवारी(दिल्ली), एम.पी सिंह, बलिराज पाण्डेय, आनन्द तिवारी, अरुण कुमार श्रीवास्तव, नीरज खरे, विभांशु केशव, अशोक आनन्द(सभी वाराणसी), डॉ. विनोद मिश्र'कैमूरी', कवि मुनेश, (सासाराम), डॉ.शशि कुमार सिंह (मायाबंदर, अंडमान-निकोबार), हरिराम द्विवेदी 'हरि भइया' आदि ने रचना पाठ से समां बांध दिया।

उल्लेखनीय है कि 'वाराणसी व्यंग्योत्सव-2018' बनारस का पहला आयोजन है जो व्यंग्य पर पूरी तरह केंद्रित रहा, बनारस में इस प्रकार के प्रथम आयोजन के लिए हिंदुस्तानी भाषा अकादमी दिल्ली और प्रगतिशील लेखक संघ वाराणसी की जनसामान्य द्वारा बहुत सराहना की गई ।

"हिंदुस्तानी भाषा काव्य प्रतिभा सम्मान" : 'पुस्तक लोकार्पण एवं सम्मान समारोह' सम्पन्न

रविवार, 29 अप्रैल 2018 को हिंदुस्तानी भाषा अकादमी द्वारा आयोजित 'लोकार्पण एवं सम्मान समारोह' गांधी शांति प्रतिष्ठान, नई दिल्ली के सभागार में सम्पन्न हुआ । दो सत्रों में सम्पन्न हुए इस भव्य समारोह के प्रथम सत्र की अध्यक्षता गीत मनीषी श्रद्धेय माहेश्वर तिवारी ने की । विशिष्ट अतिथियों के रूप में सुविख्यात गीतकार डॉ धंनजय सिंह, गीत ऋषिका डॉ सीता सागर और वरिष्ठ साहित्यकार डॉ बी.एल.गौड़ मंचासीन थे । दीप प्रज्ज्वल और अतिथियों के स्वगत के उपरांत डॉ सीता सागर द्वारा सरस्वती वंदना से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ । सर्वप्रथम 'हिंदुस्तानी भाषा काव्य प्रतिभा सम्मान' योजना के अंतर्गत चयनित देश के श्रेष्ठ 70 गीतकारों के गीतों की पुस्तक 'शब्द साधना' का लोकार्पण हुआ। 'चयनित गीतकारों में से 'प्रथम हिंदुस्तानी भाषा काव्य प्रतिभा सम्मान' लखनऊ की कवयित्री सुश्री संध्या सिंह को दिया गया जिसमें सम्मान राशि 5100/- , सम्मान पत्र, श्रीफल, शाल और स्मृति चिन्ह अर्पण किया गया । इसके उपरांत योजना में चयनित और 'शब्द साधना' में सम्मलित  देश के 12 प्रदेशों सहित नेपाल से पधारे गीतकारों को स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्रम, सम्मान पत्र और पुस्तक की प्रति भेंट करके सम्मानित किया गया । मंचासीन अतिथियों ने अकादमी की कार्यशैली और योजनाओं को बहुत सराहा । आ0 माहेश्वर तिवारी जी ने कहा कि अगर देश की संस्कृति और साहित्य को बचाना है तो भाषा को बचाना ही होगा। उन्होंने अकादमी के अध्यक्ष श्री सुधाकर पाठक के भारतीय भाषाओं के प्रति प्रेम और उनके प्रसार और संवर्धन के प्रयासों की प्रशंसा की । डॉ सीता सागर और डॉ धंनजय सिंह जी ने गीत चयन के दौरान अपने अनुभवों को साझा किया और अकादमी के भाषा से संबंधित कार्यक्रमों से जुड़ने की बात कही । डॉ. बी . एल. गौड़ ने अकादमी के प्रयासों को सराहा और अकादमी को हर संभव सहायता देने की बात कही। प्रथम सत्र की समाप्ति मंचासीन अतिथियों के गीत पाठ से हुआ । श्रद्धेय माहेश्वर तिवारी जी और डॉ धंनजय सिंह के गीतों ने सभी के मन को छुआ,वहीं डॉ सीता सागर के सूफी गीत पर श्रोता झूम उठे । दोनों सत्रों का कुशल एवं प्रभावशाली मंच संचालन अकादमी के अध्यक्ष श्री सुधाकर पाठक ने स्वयं किया । उनके धैर्य और विनम्रता को अतिथियों ने खूब सराहा । भाषा पर उनके विचारों ने उपस्थित रचनाकारों को सोचने पर विवश कर दिया । उन्होंने संक्षेप में परंतु पूर्ण दृढ़ता से अकादमी के पक्ष को रखा ।

ज्ञात हो कि इस योजना में देश-विदेश से 248 वरिष्ठ और नवांकुर गीतकारों ने अपनी प्रविष्टियां भेजी थीं। देश के सुविख्यात वरिष्ठ गीतकारों के निर्णायक मंडल (डॉ लक्ष्मीशंकर वाजपेई, डॉ धंनजय सिंह, डॉ सीता सागर ) के द्वारा 70 श्रेष्ठ गीतकारों का और एक सर्वश्रेष्ठ गीतकार का चयन किया गया जिनके दो-दो गीतों की 'शब्द साधना' गीत संग्रह में सम्मलित किया गया है ।

स्वादिष्ट सामूहिक भोज के उपरांत द्बितीय सत्र के प्रारंभ में अकादमी द्वारा प्रकाशित दो पुस्तकों का लोकार्पण हुआ । अकादमी की साहित्यिक सलाहकार, वरिष्ठ कथाकार सुश्री सुरेखा शर्मा की 'प्रतिनिधि कहानियां' और युवा कवयित्री सुश्री सुधा कुमारी 'जूही' की 'कुछ मासूम सी बातें' । मंचासीन अतिथियों में सुविख्यात वरिष्ठ कथाकार सुश्री सविता चड्ढा, सुलभ साहित्य अक़दमी के सचिव डॉ अशोक कुमार 'ज्योति', साहित्यकार डॉ रवि शर्मा 'मधुप' और लेखक एवं शिक्षाविद डॉ रमेश तिवारी थे ।

देश भर से पधारे वरिष्ठ गीतकारों ने अपने बेहतरीन गीतों के पाठ से सबको मन को छुआ वहीं युवा गीतकारों ने अपने पाठ से यह भरोसा दिलाया कि उनके हाथों में गीत विधा का भविष्य सुरक्षित है । वरिष्ठ गीतकार आ0 डॉ लक्ष्मीशंकर वाजपेई दूसरे सत्र में कुछ विलंब से पधारे । अपने संबोधन में डॉ वाजपेयी ने भाषा के संरक्षण के लिए सबसे अपील की और अकादमी के प्रयासों को सराहा ।

अकादमी के लिए यह आयोजन बहुत महत्वपूर्ण था । इसमें सम्मानित गीतकार देश के कोने-कोने से पधारे थे । उनके आवास, भोजन आदि अनेक जिम्मेदारियों को अकादमी के पदाधिकारियों ने पूरी जिम्मेदारी से निभाया ।

हिंदुस्तानी भाषा अकादमी की केंद्रीय समिति की बैठक

हिंदुस्तानी भाषा अकादमी की केंद्रीय समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक दिनाँक 1 अप्रैल 2018 को दिल्ली में हुई । इस बैठक का मुख्य विषय अकादमी के आगामी आयोजन 'काव्य प्रतिभा सम्मान' एवं 'शब्द साधना' (गीत संग्रह) के लोकार्पण की तैयारी का था । बैठक में अकादमी की त्रैमासिक पत्रिका के नए संपादक मंडल के मनोनीति पदाधिकारियों का सम्मान भी किया गया । ज्ञात हो कि डॉ रमेश तिवारी जी को कार्यकारी संपादक, सुश्री सविता चड्ढा जी को प्रबन्ध संपादक, श्री राम सिंह मेहता जी को अकादमी का वित्तीय सलाहकार और श्री विजय कुमार शर्मा जी को पत्रिका का सह संपादक मनोनीति किया गया है ।

अकादमी के अध्यक्ष श्री सुधाकर पाठक ने कहा कि यह एक अभूतपूर्व आयोजन है जिसमें गीत विधा पर इतनी प्रविष्टियां आई हों और उनमें से एक कठिन पारदर्शी प्रक्रिया से गुज़र कर देश के 70 श्रेष्ठ गीतकारों का चयन किया गया हो ।

इस योजना की संयोजिका डॉ तारा गुप्ता जी ने पूरी चयन प्रक्रिया पर प्रकाश डाला तथा बताया कि यह यह कार्य बहुत कठिन था लेकिन सभी के सहयोग से ही इसे पूरा किया जा सका है । अकादमी की सलाहकार सुश्री सुरेखा शर्मा और सुश्री सरोज शर्मा जी ने इस समारोह में आने वाले अतिथियों को आश्वस्त किया कि यहां उनके आवास और भोजन आदि की पूर्ण व्यवस्था की जा रही है और हमारी कोशिश है कि हम उन्हें कोई परेशानी नहीं होने देंगे । अपने संदेशों के माध्यम से श्री हामिद खान, श्री भूपेंद्र सेठी, सुश्री विदुषी शर्मा, श्री विजय कुमार शर्मा, डॉ बीना राघव, सुश्री राज वर्मा ने भी सभी चयनित गीतकारों को बधाई दी । इस अवसर पर श्री विजय कुमार राय, श्री नीरज शर्मा, श्री राजकुमार श्रेष्ठ, सफल आयोजन हेतु अपने बहुमूल्य सुझाव दिए ।

इस अवसर पर अकादमी की त्रैमासिक पत्रिका 'हिंदुस्तानी भाषा भारती' के नए अंक का भी लोकार्पण भी किया गया ।

सुलभ इंटरनेशनल संस्थान में पत्रिका का लोकार्पण

'रविवार 14 अप्रैल, 2018 को सुलभ इंटरनेशनल सामाजिक संस्था के मुख्य कार्यालय सुलभ ग्राम, महावीर एन्क्लेव, पालम रोड, दिल्ली में शुचिता पर्व का आयोजन किया गया। सुलभ स्वच्छता एवं सामाजिक सुधार आन्दोलन के प्रणेता एवं संस्थापक पद्मभूषण आदरणीय डॉ विंदेश्वर पाठक के नाम पर न्यूयार्क में एक दिन 'डॉ विंदेश्वर पाठक दिवस' घोषित किया गया । संस्थान की ओर से इस दिन को 'शुचिता काव्य पर्व' के रूप में मनाया गया।

डॉक्टर पाठक 50 वर्षों से समाज के उस अंतिम पंक्ति में सबसे नीचे पायदान पर बैठे उस व्यक्ति के उत्थान के लिए कार्य कर रहे हैं जिसे समाज में एक मनुष्य के रूप में भी जीने का अधिकार नहीं था । यह एक सुखद संयोग ही है कि इसी वर्ग के उत्थान के लिए आजीवन कार्य करने वाले संविधान निर्माता भारत रत्न बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर जी की जयंती भी है जिसे संस्थान की ओर से उनकी प्रतिमा पर मालार्पण और उनके विचारों पर परिचर्चा द्वारा मनाया गया ।

इस अवसर पर हिंदुस्तानी भाषा अकादमी की त्रैमासिक पत्रिका 'हिंदुस्तानी भाषा भारती' के अंक का लोकार्पण एवं सुविख्यात कवि आदरणीय सुरेश नीरव जी की अध्यक्षता एवं संचालन में 'शुचिता काव्य पर्व' का आयोजन हुआ जिसमें देश के प्रतिष्ठित कवियों ने काव्य पाठ किया ।

हिन्दुस्तानी भाषा अकादमी की ओर से पत्रिका की प्रबंध संपादिका सुश्री सविता चड्ढा, सलाहकार श्री विजय कुमार राय, सह संपादक श्री विजय कुमार शर्मा और प्रभारी श्री भूपेंद्र सेठी ने डॉक्टर पाठक को उनके जन्मदिवस पर अंगवस्त्रम एवम पुष्पगुच्छ भेंट करके उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं । सुलभ संस्थान की ओर से आ0 डॉ पाठक जी एवं आदरणीया अमोला पाठक जी ने सभी अतिथियों का शाल एवं पुष्पों द्वारा सम्मान किया ।

अकादमी के अध्यक्ष श्री सुधाकर पाठक ने अपने उद्बोधन में सुलभ तीर्थ की इस यात्रा को अपने जीवन की एक अभूतपूर्व अनुभूति एवं सुखद अनुभव कहा । उन्होंने कहा कि यहां आकर ही इस अनुभव को प्राप्त किया जा सकता है। डॉ विन्देश्वरी पाठक को जन्मदिवस की बधाई देते हुए तथा उनके दीर्घायु जीवन की कामना करते हुए श्री सुधाकर पाठक ने कहा कि हम आने वाली पीढ़ी को गर्व से बता पाएंगे कि हमें आदरणीय डॉक्टर पाठक का सानिध्य प्राप्त हुआ था। इस विशेष अवसर पर उन्होंने पत्रिका के अंक के लोकार्पण के लिए भी सुलभ संस्थान का आभार व्यक्त किया ।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर हिंदुस्तानी भाषा अकादमी की ओर से सुश्री सविता चड्ढा जी के संयोजन में सम्मान समारोह एवं काव्य/विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया । इस अवसर अलग अलग क्षेत्र में सक्रिय महिलाओं को सम्मानित किया गया । समारोह में मासिक पत्रिका 'ककसाड' की संपादिका सुश्री कुसुम लता सिंह, हिंदुस्तानी भाषा अकादमी के अध्यक्ष श्री सुधाकर पाठक, वरिष्ठ पदाधिकारी श्री भूपेंद्र सेठी, श्री विजय कुमार शर्मा, पत्रिका के कार्यकारी संपादक डॉ रमेश तिवारी, सुश्री विदुषी शर्मा, कवि श्री राम लोचन जी के अतिरिक्त श्री सुभाष चड्ढा जी की विशेष उपस्थिति रही। इस अवसर पर सभी उपस्थित महिलाओं ने अपने विचार रखे । सम्मलित सभी महिलाएं पहली बार इस तरह के आयोजन में सम्मलित हुई थीं और सम्मानित होकर बहुत खुश थीं । उनकी ओर से इस तरह के आयोजनों से जुड़ने की और सहभागिता करने की बात भी हुई । समारोह के सफल आयोजन के लिए इसकी सूत्रधार और संयोजिका आदरणीया सविता चड्ढा जी को साधुवाद ।

सामूहिक परिचर्चा : राष्ट्रीय संस्कृति और मातृभाषा

'वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग','केंद्रीय हिंदी निदेशालय', (मानव संसाधन मंत्रालय, भारत सरकार) ,पी.जी.डी.ए.वी. कॉलेज और हिंदुस्तानी भाषा अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में "मातृभाषा दिवस" के अवसर पर सामूहिक परिचर्चा : राष्ट्रीय संस्कृति और मातृभाषा ( 21 फरवरी2018) स्थान : सेमिनार हाल, पी जी डी ए वी कॉलेजनेहरू नगर, दिल्ली में किया गया । इस भव्य आयोजन में इस अवसर पर इन विद्वान वक्ताओं ने अपने विचार रखे :

  1. प्रो. अवनीश कुमार, अध्यक्ष, वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग, भारत सरकार
  2. डा. रवीन्द्र कुमार गुप्ता, प्राचार्य, पीजीडीएवी सांध्य महाविद्यालय
  3. श्री उमेश चतुर्वेदी, सलाहकार, प्रसार भारती,
  4. प्रोफेसर लालचंद, निदेशक, एनसीईआरटी, दिल्ली
  5. श्री जय प्रकाश फ़ाकिर, निदेशक, राष्ट्रीय तकनीकी संगठन, भारत सरकार।
  6. श्री सुधाकर पाठक,अध्यक्ष, हिंदुस्तानी भाषा अकादमी
  7. डा. हरीश अरोड़ा,पीजीडीएवी सांध्य महाविद्यालय
  8. डा. धनेश द्विवेदी, राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय
  9. प्रो. एस.पी. अग्रवालप्राचार्य, रामानुजन कॉलेज
  10. प्रो. विद्या सिन्हा, प्रोफेसर, किरोड़ीमल कॉलेज
  11. डा. जे.एल.रेड्डी, तेलुगु-हिंदी भाषा सेवी
  12. डा. अजय कुमार मिश्र, संस्कृत-हिंदी भाषा सेवी
कॉर्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षकों, छात्रों के साथ ही केंद्रीय हिंदी निदेशालय और तकनीकी शब्दावली आयोग से भी बड़ी संख्या में अधिकारी सम्मलित हुए। अकादमी की ओर से डॉ रमेश तिवारी, श्री भूपेंद्र सेठी, श्री विजय शर्मा, सुश्री सरोज शर्मा, सुश्री विदुषी शर्मा, श्री हामिद खान, श्री विजय कुमार राय, सुश्री नीरू मोहन की विशेष उपस्थिति रही और सभी ने इस सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । कॉर्यक्रम के सफल आयोजन और संचालन के लिए सुश्री निरुपम माथुर, डॉ रमेश तिवारी और डॉ हरीश अरोड़ा का विशेष सहयोग और मार्गदर्शन रहा ।

'छात्रों के लिए हिंदी भाषा चयन के लिए कार्यशाला का आयोजन '

7 फरवरी 2018 को आज हिंदुस्तानी भाषा अकादमी की ओर से दिल्ली के प्रतिष्ठित महाराजा अग्रसेन पब्लिक स्कूल, अशोक विहार, दिल्ली में नवमीं कक्षा में प्रवेश लेने वाले बच्चों के लिए भाषा चयन के लिए एक कार्यशाला का आयोजन किया गया । ज्ञात हो कि बच्चे पहली कक्षा से अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई कर रहे हैं और नवमीं कक्षा में अंग्रेजी को अनिवार्य विषय लेते हुए उन्हें फ्रेंच, जर्मन, संस्कृत और हिंदी में से किसी एक भाषा का चयन करना है । अभिवावकों और बच्चों का विदेशी भाषा के प्रति आकर्षण और हिंदी को कम महत्वपूर्ण भाषा मानने के कारण यह विकट स्थिति है । इस स्कूल में इस हिंदी कार्यशाला की तरह पहले जर्मन और फ्रेंच भाषा के चयन को लेकर भी कार्यशाला उनके विषय विशेषज्ञों द्वारा ली जा चुकी थीं। विद्यालय में हिंदी की शिक्षिका जो अकादमी में पूर्ण सक्रियता से जुड़ी हुई हैं, उन्होंने अपनी प्राचार्या और प्रबंधन को हिंदी कार्यशाला के लिए सहमत किया। उनके और स्कूल की हिंदी विभागाध्यक्ष के विशेष प्रयासों से यह एक सफल कार्यशाला का आयोजन हो पाया । इस कार्यशाला में मेरे साथ मुख्य वक्ता के रूप में श्री राम कॉलेज आफ कॉमर्स, दिल्ली विश्विद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ रवि शर्मा जी थे जो कि वरिष्ठ साहित्यकार हैं और इस तरह के आयोजनों से लंबे समय से जुड़े हुए हैं। स्कूल की प्राचार्या, उप प्राचार्य और संबंधित सभी शिक्षकों की ओर से हमारा स्वागत किया गया और सभी ने इस आयोजन में पूर्ण सहयोग दिया । स्कूल सभगार में 100 से अधिक छात्रों ने लगभग डेढ़ घंटे चली इस कार्यशाला में पूरे मन से हमारी बातों को सुना और सहभागिता की । हिंदी क्यों पढ़ें? हिंदी भाषा की विशेषता, हिंदी में रोजगार, वैश्विक परिवेश में हिंदी आदि कई गंभीर विषयों को इसमें सम्मलित किया गया । कार्यशाला के उपरांत हमारी अनुपस्थिति में छात्रों से मिली जानकारी के बाद शिक्षकों और प्राचार्या द्वारा हमें बताया गया कि ऐसे छात्र जो हिंदी चयन में रुचि नहीं ले रहे थे, उनके भी सकारात्मक विचार उन्हें मिले हैं। कुल मिलाकर यह कार्यशाला बहुत सफल रही । इस आयोजन का पूर्ण श्रेय स्कूल की हिंदी भाषा की शिक्षिका और अकादमी सदस्य सुश्री निशि शर्मा और हिंदी विभागाध्यक्ष सुश्री शिखा मल्होत्रा को जाता है । हमें आशा है...यह सिलसिला चलता रहेगा... ।

शब्द गाथा २ : लोकार्पण एवं सम्मान समारोह

अकादमी की ओर से 13 जनवरी, 2018 को विश्व पुस्तक मेले के 'लेखक मंच' पर  'द्वितीय हिंदुस्तानी भाषा समीक्षा सम्मान एवम् शब्दगाथा-2 लोकार्पण समारोह' का भव्य आयोजन किया गया । इस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ सच्चिदानंद जोशी, सचिव, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में विख्यात समालोचक श्री सुभाष चंदर जी उपस्थित थे । समारोह में कई सुप्रसिद्ध साहित्यकार, लेखक, साहित्य प्रेमी और देश भर से चयनित समीक्षक पधारे । समारोह के अध्यक्ष आदरणीय डॉ नामवर सिंह जी स्वास्थ्य कारणों से इस समारोह में सम्मलित नहीं हो पाए । ज्ञात हो कि अकादमी प्रत्येक वर्ष पुस्तकों का चयन करके उन पर देश भर से समीक्षाएं आमंत्रित करती है । प्राप्त समीक्षाओं में से निर्णायक मंडल द्वारा श्रेष्ठ 50 का चयन किया जाता है और प्रत्येक पुस्तक के एक सर्वश्रेष्ठ समीक्षक का चयन भी होता है जिसे 5100/- रुपये की सम्मान राशि और सम्मान पत्र से सम्मानित किया जाता है । इस वर्ष इस योजना में दो पुस्तकों का चयन हुआ था । सुश्री सीमा सिंह की पुस्तक 'स्वामी विवेकानंद - कर्मयोग और उसका रहस्य और सुश्री नीतू सिंह राय का कविता संग्रह 'हौसलों की उड़ान'। इन पर प्राप्त श्रेष्ठ समीक्षाओं को पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया गया जिसका शीर्षक 'शब्दगाथा-2' दिया गया । इस वर्ष यह सम्मान डॉ राजेश कुमारी (लखनऊ) एवम् डॉ विदुषी शर्मा (दिल्ली) को प्रदान किया गया ।

'परिचर्चा : आठवीं अनुसूची और हिंदी '

हिंदुस्तानी भाषा अकादमी और राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के संयुक्त तत्वाधान में विश्व पुस्तक मेले में एक परिचर्चा का आयोजन किया गया । विषय था 'आठवीं अनुसूची और हिंदी' । इसमें विशिष्ट वक्ताओं में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के अध्यक्ष श्री बलदेव भाई शर्मा, वैज्ञानिक एवम् तकनीकी शब्दावली आयोग के अध्यक्ष प्रो. अवनीश कुमार, वरिष्ठ पत्रकार श्री राहुल देव, हिंदुस्तानी भाषा अकादमी के अध्यक्ष श्री सुधाकर पाठक । परिचर्चा का कुशल संचालन डॉ. रवि शर्मा, विभागाध्यक्ष हिंदी विभाग, श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स ने किया । इस अवसर पर कई गणमान्य अतिथि भी उपस्थित थे । डॉ मुक्ता, पूर्व निदेशक, हरियाणा साहित्य अकादमी, श्री राकेश पांडेय, सुश्री गीता पंडित, कुसुम पालीवाल, डॉ वीना, सुश्री नीतू सिंह राय, सुश्री यासमीन खान, केदार नाथ जी, श्री पवन अरोड़ा, श्री श्याम स्नेही, श्री राम लोचन जी, आदि प्रमुख थे । अकादमी के वरिष्ठ सदस्य सर्वश्री भूपेंद्र सेठी, हामिद खान, विजय शर्मा, विजय राय, डॉ रमेश तिवारी, नीरज शर्मा, सूश्री सुरेखा शर्मा, सरोज शर्मा, सीमा सिंह, डॉ तारा गुप्ता, डॉ बीना राघव ने अतिथियों का पुष्प गुच्छ और अंगवस्त्रम से स्वागत किया । इस अवसर पर रोचक प्रश्न उत्तर सत्र भी हुआ जिसमें उपस्थित भाषा प्रेमियों ने कई गंभीर और रोचक प्रश्न किये और अतिथियों द्वारा जिनके उत्तर उतनी ही गंभीरता से दिए गए । इस सत्र में हिंदी प्रेमी जनसमुदाय की भाषा के प्रति चिंता साफ दिखी । परिचर्चा का समापन श्री विजय कुमार शर्मा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन से हुआ ।

मेधावी छात्र सम्मान समारोह 2017

3 दिसंबर, 2017 को अनुव्रत भवन, नई दिल्ली में अकादमी की ओर से ‘मेधावी छात्र समारोह’ का आयोजन किया गया I समारोह में मुख्य अतिथि श्री मनीष सिसोदिया, उप मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री,दिल्ली सरकार एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में सुश्री पूनम जुनेजा, पूर्व संयुक्त सचिव, राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, भारत सरकार थीं I  इस समारोह में दिल्ली के सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी विद्यालयों के 10वीं कक्षा में  हिन्दी विषय में उत्कृष्ट अंकों से उत्तीर्ण होने वाले लगभग 250 विद्यार्थियों को ‘भाषा दूत सम्मान’ से सम्मानित किया गया I सम्मान समारोह में उन्हें अकादमी की ओर से सम्मान पत्र और स्मृति चिन्ह भेंट किया गया I समारोह में आंध्रा एजूकेशन सोसाइटी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, दीनदायल उपाध्याय मार्ग, दिल्ली की छात्रा कुमारी डी. कृष्णा श्री को ‘भाषा प्रहरी सम्मान’ दिया गया जिसमें सम्मान पत्र, अंगवस्त्रम, स्मृतिचिन्ह के साथ 3100/- रुपये सम्मान राशि भी प्रदान की गई I इस अवसर पर सम्मानित होने वाले विद्यार्थियों के हिन्दी विषय के शिक्षकों को भी सम्मानित किया गया I समारोह में सम्मानित होने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों सहित लगभग 450 से ज्यादा लोग उपस्थित थे I

समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में अपने वक्तव्य में सुश्री पूनम जुनेजा ने हिन्दी के महत्व और वर्तमान में हिन्दी की स्थिति पर प्रकाश डाला और सम्मानित होने वाले विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को शुभकामनायें दीं I अकादमी के अध्यक्ष श्री सुधाकर पाठक ने अपने स्वागत उद्बोधन में अकादमी के कार्यों और उदयेशयों की विस्तार से चर्चा की I उन्होने ‘मेधावी छात्र सम्मान’ के आयोजन के संबंध में आई मुश्किलों को साझा किया लेकिन साथ ही इस बात पर जोर दिया कि हिन्दी को सही स्थान दिलाने का यही एकमात्र रास्ता है कि हम छात्रों तक जाएँ और हिन्दी के महत्व को उनको बताएं I अकादमी की आगामी योजनाओं की चर्चा करते हुए श्री पाठक ने कहा कि ‘हमने भाषा के लिए कार्य करते हुए यह महसूस किया है कि निजी विद्यालओं के प्रबन्धकों को ऐसा लगता है कि हिन्दी बहुत ही महत्वहीन और सरल भाषा है अतः इसे किसी भी स्तर का अध्यापक पढ़ा देगा I समान्यतः ऐसा देखने में आया है कि प्राथमिक कक्षाओं में हिन्दी पढ़ाने के लिए कोई प्रशिक्षित अध्यापक नहीं है और इसे किसी अन्य विषय के अध्यापक द्वारा खानापूर्ति के तौर पर पढ़ाया जा रहा है I प्रबन्धकों को यह भी लगता है कि बड़ी कक्षाओं में छात्र स्वयं ही हिन्दी विषय को छोड़ देंगे और उनके बोर्ड के परिणाम पर इसका कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा I इस मानसिकता के चलते छात्रों में व्याकरण, उच्चारण, वर्तनी संबंधी गंभीर दोष देखने को मिल रहे हैं और उनकी इस पढ़ाई से हिन्दी की नींव ही खराब हो रही है जिसेके कारण छात्र आजीवन इस त्रुटियों के साथ हिन्दी को लिख/बोल रहे हैं, साथ ही वह हिन्दी को बहुत ही महत्वहीन, नीरस और अव्यवारिक भाषा मानने लगे हैं I इसके अतिरिक्त सरकारों की ओर से भी पहली कक्षा से अँग्रेजी माध्यम से शिक्षा के फरमान से भी हिन्दी का बहुत बड़ा नुकसान हो रहा है I इसके लिए अकादमी ने एक कार्य योजना बनाई है जिसके अनुसार आगामी एक वर्ष में दिल्ली के निजी विद्यालओं के कुल 1200 प्राथमिक कक्षा को हिन्दी पढ़ाने वाले शिक्षकों की कुल 12 कार्यशालाओं का आयोजन करना है I प्रत्येक माह में 100-100 शिक्षकों के समूह में दो सत्रों में एक दिन की कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा जिसे विद्वान भाषा विशेषज्ञ शिक्षकों को वर्तनी, उच्चारण, व्याकरण संबंधी त्रुटियों को समझायेंगे साथ ही हिन्दी को कैसे रुचिकर ढंग से पढ़ाया जाए यह भी बताएँगे I’ श्री पाठक ने अकादमी की इस महत्वकांक्षी योजना में सरकार सहित सभी से सहयोग के अपील की I

इस अवसर पर कई प्रमुख गणमान्य अतिथियों में राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय के उप संपादक डॉ धनेश द्विवेदी, समाजसेवी सुश्री मिथलेश पाठक, वरिष्ठ कथाकार सुश्री सविता चड्ढा, कृष्णा जेमिनी, वीणा अग्रवाल, सविता स्याल, कर्नल मलिक, सुश्री राज वर्मा, काजल चौबे, निशि शर्मा ‘जिज्ञासु’, नीरज शर्मा, अशोक माथुर  उपस्थित थे I इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अकादमी के सलाहकार मण्डल और कार्यसमिति के सदस्य सर्वश्री भूपेन्द्र सेठी, हमीद खान, डॉ रमेश तिवारी, विजय कुमार शर्मा, राजकुमार ‘श्रेष्ठ’, नीरज दुबे, सुश्री सुरेखा शर्मा, सरोज शर्मा, सीमा सिंह, विदुषी शर्मा, मंजीत कौर, डॉ दमयंती शर्मा, डॉ पुष्पलता भट्ट, अमरनाथ गिरि का विशेष योगदान रहा I समारोह का सुरिचिपूर्ण और कुशल संचालन गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग के अधिकारी श्री सत्येन्द्र दहिया ने कियाI

'कार्यसमिति की त्रैमासिक बैठक '

'हिंदुस्तानी भाषा अकादमी' की कार्यसमिति की बैठक 7 अक्टूबर, 2017 (शनिवार) को 'दिल्ली हिंदी साहित्य सम्मेलन' नई दिल्ली के कार्यालय में अध्यक्ष श्री सुधाकर पाठक की अध्यक्षता में संम्पन्न हुई । इस बैठक में कार्यसमिति के सदस्य सर्व श्री हामिद खान, भूपेंद्र सेठी, विजय कुमार राय, डॉ रमेश तिवारी, अमरनाथ गिरी, राम सिंह मेहता, सुश्री सीमा सिंह, सरोज शर्मा, डॉ तारा गुप्ता, डॉ बीना राघव, मंजीत कौर सम्मलित हुए । इस बैठक में सुश्री विदुषी शर्मा विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में सम्मलित हुईं । बैठक में आगामी कार्यक्रमों पर चर्चा हुई, इसमें सम्मलित कुछ महत्वपूर्ण विषय :-

  • 1. द्वितीय हिंदुस्तानी भाषा साहित्य समीक्षा सम्मान एवम् शब्दगाथा -2 का प्रकाशन ।
  • 2. हिंदुस्तानी भाषा काव्य प्रतिभा सम्मान एवम् शब्द साधना का प्रकाशन ।
  • 3. मेधावी छात्र सम्मान समारोह एवम् हिंदुस्तानी भाषा प्रहरी सम्मान ।
  • 4. हिंदी भाषा के शिक्षकों के लिए कार्यशाला का आयोजन ।
  • 5. अन्य राज्य के हिंदी के मेधावी छात्रों का सम्मान ।
  • 6. राज्य स्तरीय एवम् विश्व पुस्तक मेले में सहभागिता एवम् आयोजन ।
  • 7. पुस्तक लोकार्पण एवम् हिंदी पर परिचर्चा आदि ।
इस अवसर पर सुश्री सीमा सिंह की पुस्तक 'कुछ यादें, कुछ बातें...अमृता प्रीतम एवम् अकादमी की पत्रिका के अंक का लोकार्पण भी किया गया । बैठक का समापन समिति के वरिष्ठ सदस्य श्री भूपेंद्र सेठी के धन्यवाद एवम् जलपान के बाद हुआ ।

'पुस्तक लोकार्पण एवं सम्मान समारोह' संपन्न

२ सितंबर, २०१७ को हिंदुस्तानी भाषा अकादमी द्वारा प्रकाशित एवम् श्री दिलबाग सिंह द्वारा अनुवादित श्री सुधाकर पाठक के कविता संग्रह 'ज़िंदगी कुछ यूँ ही' के पंजाबी संस्करण का 'लोकार्पण एवं सम्मान समारोह' पंजाबी भवन , नई दिल्ली में आयोजित किया गया | कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ.कृष्णा जैमिनी द्वारा सरस्वती वंदना और दीप-प्रज्वलन से हुआ| मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध पत्रकार श्री राहुलदेव जी, कार्यक्रम के अध्यक्ष श्री विनोद कुमार मिश्र महासचिव (विश्व हिंदी सचिवालय)एवं विशिष्ट अतिथि डॉ सीता सागर (वरिष्ठ कवयित्री) और लेखक दिलबाग सिंह 'विर्क' जी के सानिध्य में यह शाम यादगार रही। इस अवसर पर उनका तथा पत्रकारों का सम्मान स्मृति चिह्न, शॉल व अंगवस्त्रं के साथ किया गया। हिंदुस्तानी भाषा अकादमी के उद्देश्यों और कार्यविस्तार के बारे में अकादमी के अध्यक्ष श्री सुधाकर पाठक ने बताते हुए कहा कि आज हिंदी और दूसरी भाषाओं में सामंजस्य बिठाते हुए एक-दूसरी भाषाओं में अनुवाद होना चाहिए जो लोगों को समीप लाएगा और भाषाई विरोध समाप्त होगा। अकादमी ने यह पहल शुरू कर दी है। श्री राहुलदेव जी ने कहा बेशक हिंदी के दुनिया में सर्वाधिक साहित्यकार हैं तथापि भारत से केवल हिंदी ही नहीं, अन्य भारतीय प्रादेशिक भाषाएँ भी विलुप्त होने के कगार पर हैं। हिंदी पाठक को अपनी रचनाओं या मित्रों की रचनाओं से इतर भी पढ़ना चाहिए और "मैं" से दूर रहकर सही मायनों में जागरूक बनना चाहिए। उन्होंने निजी (पब्लिक) विद्यालयों के शैक्षिक परिवेश के चलते आज के बच्चों के हिंदी से कटते जाने पर चिंता जताई। डॉ. सीता जी ने कहा कि हम अंग्रेजी या अन्य भाषा सीखें किंतु अंग्रेजियत से बचें। घर के जैसे संस्कार होंगे, बच्चे वैसे ही बनेंगे।कई भाषाएँ सीखने में कोई बुराई नहीं किंतु पहले स्थान पर राष्ट्रभाषा को रखें। उसका अपमान न करें अन्यथा आप देशभक्ति से दूर हैं। अच्छी शख्शियत अंग्रेजी की मोहताज़ नहीं। इस अवसर पर कई युवा टी वी पत्रकारों को सम्मानित किया गया। जिनके नाम हैं-अरविंद शुक्ला (टी. वी.टूडे समूह), आशीष चौबे(इंडिया चौबे), देवेश वशिष्ठ 'खबरी' (न्यूज २४), उदय कुमार सिंह (अहसास टी.वी.), नवीन शिशौदिया (इंडिया वाइस), अमित कुमार सिंह(न्यूज १८ इंडिया), हर्षित मिश्रा(टोटल टी. वी.) । इस अवसर पर दिल्ली, गुरुग्राम, नोयडा, गाजियाबाद के कई वरिष्ठ साहित्यकारों ने शिरकत की। डॉ कृष्णा जेमिनी जी, लाडो कटारिया जी, डॉ घमंडीलाल अग्रवाल, श्याम स्नेही जी, जूही जी , कमलेश जी आदि बहुत से साहित्यकारों ने अपनी उपस्थिति दर्ज़ कराई। इसके अतिरिक्त श्री पवन अरोरा , केदारनाथ शब्द मसीह , सुश्री पूनम मटिया, मनीष पांडे जी, सुश्री शुभदा बाजपेई, महेंद्र शर्मा जी, डॉ के चौधरी आदि प्रमुख थे । अकादमी की कार्यसमिति के पदाधिकारी डॉ रमेश तिवारी जी, हामिद खान जी,सुरेखा शर्मा जी, सरोज शर्मा जी, विजय कुमार राय, भूपिंद्र सेठी,राजकुमार श्रेष्ठ, डॉ धनेश द्विवेदी जी, नीरज दुबे जी, सुश्री कल्पना मनोरमा जी, आशुतोष द्विवेदी जी, डॉ पुष्पलता भट्ट जी, सीमा सिंह जी, डॉ तारा गुप्ता जी, नीतू सिंह राय, पूनम जी, मंजीत कौर आदि ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। इसके साथ ही विश्व हिंदी साहित्य परिषद के अध्यक्ष श्री आशीष कंदवे और हिंदी सेवी श्री राकेश पांडेय जी विशेष रूप से उपस्थित थे । कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार श्री बृजेश द्विवेदी (प्रवक्ता, हिंदुस्तानी भाषा अकादमी) और डॉ. बीना राघव (साहित्यिक सचिव , हिंदुस्तानी भाषा अकादमी) ने किया। माँ भारती की तेजस्विता को बढ़ाता यह कार्यक्रम बेहद सफल रहा..।दिलबाग सिंह जी ने सुधाकर जी की कविता 'कोल्हू का बैल' पंजाबी भाषा में सुनाई। हिंदी भाषा को लेकर श्री विनोद मिश्र जी, राहुल जी एवं सुधाकर पाठक जी के वक्तव्य मर्मस्पर्शी और सारगर्भित थे। सीता जी के सुमधुर स्वर में गीत सुनकर दर्शक वाह!वाह! कर उठे। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन से हुआ।

हिंदुस्तानी भाषा अकादमी और कादम्बिनी क्लब का संयुक्त आयोजन

हिंदुस्तानी भाषा अकादमी एवं कादम्बिनी क्लब के संयुक्त तत्वावधान में जगमग दीप ज्योति पत्रिका, अलवर (राज.) के इस मास के 'बाल एवं युवा विशेषांक' जिसका संपादन साहित्यकारा सुरेखा शर्मा द्वारा हुआ है, का भव्य लोकार्पण आज आर्य समाज मंदिर (माडल टाउन) गुरुग्राम में किया गया। इस अवसर पर अति सरस काव्य -गोष्ठी का भी आयोजन भी किया गया। मुख्य अतिथिगण -

  • * श्री सुधाकर पाठक (अध्यक्ष हिंदुस्तानी भाषा अकादमी)
  • * श्री घमंडीलाल अग्रवाल (वरिष्ठ साहित्यकार, गुरुग्राम)
  • * श्रीमती कमल कपूर (अध्यक्षा-नारी अभिव्यक्ति मंच)
  • * नरेंद्र गौड (अध्यक्ष -शब्द शक्ति साहित्यिक संस्था)
  • * श्री मुकुल शर्मा 'सुमन' (अध्यक्ष- प्रा•हि• साहित्य सम्मेलन गुरुग्राम)
  • * श्री अशोक शर्मा जी (संचालक -आर्यसमाज मंदिर)
  • * संयोजिका- श्रीमती सुरेखा शर्मा ( साहित्यिक सलाहकार, हिंदुस्तानी भाषा अकादमी)

गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और दिल्ली के साहित्यकारों यथा सुंदर कटारिया, सुनील जी, नरेंद्र खामोश जी, सेठी जी, सीमा सिंह, प्रसिद्ध गीतकारा तारा गुप्ता जी, विजय राय जी, भूपिंदर सेठी जी, हामिद खान जी, मुक्ता जी , डॉ. सुरेंद्र वशिष्ठ जी, कृष्णा जैमिनी जी , वीणा अग्रवाल जी, ममता जी , सरोज शर्मा जी , श्री राजकुमार श्रेष्ठ, आभा कुलश्रेष्ठ जी आदि की भी गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी ने बहुत आकर्षक ढंग से काव्य पाठ किए और गीत-ग़ज़ल, मुक्तक, हास्य-व्यंग्य आदि की झड़ी लगा दी।

अकादमी की ओर से अन्य उपस्थित सदस्यों में श्री विजय कुमार राय जी, सलाहकार और श्री Hamid Khan जी , सोशल मीडिया प्रभारी प्रमुख थे । हिंदी की राष्ट्रीय स्वीकार्यता अभियान से भी जोड़ता यह कार्यक्रम बेहद सफल रहा।अकादमी के अध्यक्ष श्री सुधाकर पाठक जी ने हिंदी और आज के रचना जगत पर चर्चा की और साहित्यकारों को अकादमी से जुड़कर भाषा के लिए कार्य करने की अपील की । वहां उपस्थित साहित्यकारों ने अकादमी के कार्यों की प्रशंसा की और अकादमी से जुड़ने की बात कही । जल्दी ही गुरुग्राम में हिंदी की राष्ट्ररीय स्वीकार्यता पर परिचर्चा की बात भी हुई । सुश्री कमल कपूर जी ने सविस्तार जगमग दीप ज्योति विशेषांक के बारे में बताया।

डॉ बीना राघव ने दोहे और हरियाणवी कविता प्रस्तुत कर अपनी उपस्थिति दर्ज की । लोकार्पण समारोह तथा काव्यगोष्ठी में मंच संचालन डॉ. बीना राघव एवं कृष्णा जैमिनी जी ने किया।

अकादमी की त्रैमासिक बैठक संपन्न

हिंदुस्तानी भाषा अकादमी केंद्रीय कार्यसमिति की महत्वपूर्ण बैठक 14 मई, 2017 (रविवार) दोपहर 2 बजे दिल्ली हिंदी साहित्य सम्मलेन, 31, उत्तरी परिसर, पंचकुइयां रोड निकट रामकृष्ण आश्रम मेट्रो स्टेशन नई दिल्ली - 110001 पर सम्पन्न हुई। बैठक में समिति के सदस्यों के अतिरिक्त हिंदी और भारतीय भाषाओँ के लिए कार्य करने वाले गणमान्य अतिथियों को विशेष आमंत्रित सदस्यों के रूप में इस बैठक में बुलाया गया था । बैठक के प्रारंभ में सभी सदस्यों का परिचय हुआ उसके बाद अकादमी के अध्यक्ष श्री सुधाकर पाठक ने अपने स्वागत उद्बोधन में अकादमी के एक वर्ष के कार्यों को विस्तार से बताया । उन्होंने बताया कि अकादमी के एक वर्ष में 14 कार्यक्रम हुए हैं जिनमें 'काव्य प्रातिभा खोज', छात्रों के लिए 'युवा काव्य प्रातिभा खोज', साहित्य समीक्षा सम्मान, दिल्ली में विश्व पुस्तक मेले में सहभागिता और परिचर्चा, काव्योत्सव, लखनऊ पुस्तक मेले में कार्यक्रम आदि के अतिरिक्त कई संस्थाओं को आर्थिक सहयोग देकर उनके साथ संयुक्त आयोजन भी किये गए ।

स्तरीय साहित्य के प्रकाशन के प्रति अपनी प्रतिबद्धिता दिखाते हुए अकादमी ने इस वर्ष देश के कई वरिष्ठ रचनाकारों और नव लेखकों की कुल 13 पुस्तकों का प्रकाशन भी किया है । हम अकादमी के एक वर्ष के कार्यों से संतुष्ट हैं और हम अपने दो महत्वपूर्ण आगामी आयोजनों की तैयारी में लगे हुए हैं। ' प्रथम हिंदुस्तानी भाषा काव्य प्रतिभा सम्मान' की संयोजिका डॉ तारा गुप्ता ने विस्तार से आयोजन की तैयारी पर प्रकाश डाला । आगामी समीक्षा सम्मान आयोजन पर कार्य कर रही सुश्री सुरेखा शर्मा और डॉ बीना राघव ने 'द्वितीय हिंदुस्तानी भाषा साहित्य समीक्षा सम्मान' के आयोजन की तैयारियों की चर्चा की जिसकी अंतिम तिथि बढ़ाकर 15 जून कर दी गई गई । बैठक में बताया गया कि 'हिंदुस्तानी भाषा भारती' के आगामी अंक पर डॉ रमेश तिवारी, सुश्री गीता पंडित, श्री नीरज दुबे और श्री विजय शर्मा जी के सहयोग से कार्य चल रहा है और जल्दी एक बेहतरीन अंक प्रकाशित होकर आ जाएगा ।

डॉ धनेश द्विवेदी, श्री अमरनाथ गिरि, सुश्री सीमा सिंह, सुश्री मंजीत कौर, श्री राजीव जायसवाल आदि के विचारों से जो बातें निकल कर आई उनमें से मुख्य अकादमी के लिए पूर्णकालिक कार्यालय, हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के लिए कार्य करने वाली सरकारी और गैरसरकारी संस्थाओं के साथ समन्वय, अकादमी का अपना मासिक/पाक्षिक साहित्यिक अखबार, अपना ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग हेतु स्टूडियो आदि थीं। श्री हामिद खान, सुश्री सरोज शर्मा, श्री भूपेंद्र सेठी ने अकादमी के कार्यों में गति लाने के उद्द्येश्य से दिल्ली और दिल्ली के बाहर अकादमी के कार्यक्रमों की बात कही और कहा कि जो सदस्य अन्य संस्थाओं से जुड़े हैं वह वहां पर अकादमी के आयोजनों की व्यवस्था करें जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग हमसे जुड़ सकें । विशेष आमंत्रित सदस्यों श्री आशुतोष द्विवेदी और नेपाली भाषा में अनुवाद कार्य करने वाले श्री राजकुमार श्रेष्ठ ने अपने बहुमूल्य विचार रखे, अकादमी के प्रयासों को सराहा और अकादमी से जुड़ने की बात की । लगभग 3 घंटे चली इस बैठक की समाप्ति जलपान और अकादमी के वरिष्ठ सदस्य श्री भूपेंद्र सेठी के धन्यवाद ज्ञापन से हुई ।

लोकार्पण : मैं बन गई इक बंजारन (कविता-संग्रह)

हिंदुस्तानी भाषा अकादमी द्वारा प्रकाशित देश की विख्यात कवयित्री डॉ. सीता सागर के गीत संग्रह 'मैं बन गई एक बंजारन' का भव्य लोकार्पण समारोह राजधानी के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संग्रहालय के सभागार में 4 जुलाई, 2016 को संपन्न हुआ। समारोह के मुख्य अतिथि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने दीप प्रज्ज्वलित करके कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। समारोह की अध्यक्षता राज्यसभा सांसद प्रोफ़ेसर रामगोपाल यादव ने की । कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ राजनेता एवं पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ प्रभा ठाकुर , प्रसिद्ध हास्य कवि श्री सुरेंद्र शर्मा , वरिष्ठ कवि डॉ कुंवर बेचैन , वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार डॉ लक्ष्मीशंकर वाजपेई मंच पर विराजमान थे । राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सहित बाहर से आये सैंकड़ों गणमान्य अतिथियों से खचाखच भरे सभागार में डॉ सीता सागर ने अपने गीतों से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया ।

अकादमी के अध्यक्ष श्री सुधाकर पाठक ने अपने स्वागत संबोधन में प्रान्तीय भाषाओं के प्रचार-प्रसार के माध्यम से हिंदी की राष्ट्रीय स्वीकार्यता के लिए अकादमी के कार्यों की चर्चा की तथा उपस्थित जनसमूह से इस पुनीत कार्य में भागीदारी की अपील की । डॉ हर्षवर्धन ने डॉ सीता सागर के गीतों का पाठ भी किया और उनके बेहतरीन सृजन के लिए शुभकामनाएं दी । प्रोफ़ेसर रामगोपाल यादव ने डॉ सीता सागर के गीतों की बहुत सराहना की और उन्हें वर्तमान समय की देश की सर्वश्रेष्ठ कवयित्री के रूप में संबोधित किया । डॉ प्रभा ठाकुर ने गीत विधा पर अपनी बात रखी तथा डॉ सीता सागर के गीतों को उत्कृष्ट काव्य की श्रेणी में रखा ।

श्री सुरेंद्र शर्मा ने कहा कि डॉ सीता सागर प्रेम स्रिंगार की कवयित्री हैं लेकिन उनके गीत ऐसे हैं जिन्हें पिता-पुत्री भी साथ-साथ बैठकर सुन सकते हैं । कार्यक्रम में कला और साहित्य से जुड़े गणमान्य अतिथियों के अलावा अकादमी के वरिष्ठ पदाधिकारी श्री हामिद खान, विजय कुमार राय, भूपेंद्र सेठी, डॉ दमयंती शर्मा, सुश्री सीमा सिंह, सुरेखा शर्मा, कुसुम शर्मा, हेमा शर्मा, सरोज शर्मा, डॉ.पुष्प लाता भट्ट और राहुल कुमार झा उपस्थित थे ।

समारोह का सुरुचिपूर्ण सञ्चालन डॉ रीना सिंह ने और धन्यवाद ज्ञापन अकादमी के प्रवक्ता श्री बृजेश द्विवेदी ने किया ।

लोकार्पण : बस एक निर्झरणी भावनाओं की (कविता-संग्रह)

हिंदुस्तानी भाषा अकादमी के तत्वाधान में दिनाक 2 अक्टूबर 2016 को उर्दूघर, दीनदयाल उपाध्याय मार्ग, दिल्ली में अकादमी की त्रैमासिक पत्रिका 'हिंदुस्तानी भाषा भारती' और अकादमी द्वारा ही प्रकाशित वरिष्ठ कवी श्री त्रिभुवन कौल जी के कविता संग्रह 'बस एक निर्झरणी भावनाओं की' का लोकार्पण एवं 'हिन्दी की राष्ट्रीय स्वीकार्यता' विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया ।

समारोह में मुख्य अतिथि विख्यात साहित्यकार डॉ हरीश नवल और अध्यक्ष श्री प्रेम कुमार शर्मा, सचिव, बैंक राजभाषा कार्यान्वयन समिति थे । इस भव्य समारोह में विशिष्ठ डॉ लालित्य ललित, संपादक, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास , डॉ हरिसुमन बिष्ट, सचिव, मैथली-भोजपुरी अकादमी, श्री महेश कुमार पाठक, सदस्य, रेलवे राजभाषा समिति, रेल मंत्रालय, डॉ धनेश द्विवेदी, संपादक, राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय , सुश्री सविता चड्डा, वरिष्ठ साहित्यकार श्री रामकिशोर उपाध्याय , वरिष्ठ एवं प्रवासी साहित्यकार प्रोफ़ेसर सरन घई की गरिमामयी उपस्थिति ने समारोह को और भी भव्यता प्रदान की । सभी सम्मानित अतिथियों ने हिंदुस्तानी भाषा अकादमी के हिंदी और विशेष रूप से हिंदुस्तानी भाषाओं के समन्वय पर किये जा रहे गंभीर और सार्थक प्रयासों की प्रशंसा के साथ ही अकादमी के साल से काम समय में ही साहित्य जगत में अपनी दमदार उपस्थिति के लिए अकादमी के अध्यक्ष श्री सुधाकर पाठक की कार्यशैली की सराहना की और बधाई तथा शुभकामनाएं दीं । इस अवसर पर डॉ हरीश नवल ने कहा कि अकादमी जिन उद्देश्यों और कार्यशैली को लेकर चल रही है, यह निश्चित है कि भविष्य में यह किसी सरकारी अकादमी से काम महत्वपूर्ण नहीं होगी । सुश्री सविता चड्डा ने कहा कि इतने काम समय में पुस्तकों का प्रकाशन , त्रैमासिक पत्रिका का प्रकाशन, 'काव्य प्रतिभा खोज' का आयोजन और चयनित युवा कवियों को बड़े मंचों तक ले जाने का कार्य निश्चित रूप से स्वागत योग्य है । श्री महेश कुमार पाठक , डॉ धनेश द्विवेदी, डॉ लालित्य ललित ने अकादमी को हर स्तर पर सहायता का भरोसा दिलाया । समारोह के अध्यक्ष श्री प्रेम कुमार शर्मा ने बैंकों में हिंदी में हो रहे कार्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला । अकादमी के अध्यक्ष श्री सुधाकर पाठक ने अकादमी के उद्देश्यों कि पूर्ति हेतु सरकारी स्तर पर यथासंभव सहायता के लिए सभी अतिथियों से अनुरोध किया ।

इस अवसर पर कवी श्री त्रिभुवन कौल के पारिवारिक सदस्यों और मित्रों के अलावा साहित्य जगत के अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे । जिनमे वरिष्ठ गजलकार श्री नंदा नूर साहब, मनीष मधुकर, ओमप्रकाश शुक्ल, संजय कुमार गिरी, डॉ. रमेश तिवारी, मनोज कामदेव शर्मा, संजीव कुमार बर्मन, सुरेश पाल 'रसाला', श्याम नंदा 'नूर', अंजुम प्यासा, हास्य व्यंग्य के कवि शैल भदावरी आदि प्रमुख हैं।

समारोह का शुभारम्भ श्री अमरनाथ गिरी द्वारा सरस्वती वंदना से हुआ। कार्यक्रम का कुशल संचालन अकादमी के विधि सलाहकार और साहित्यकार श्री शम्भु ठाकुर एवं अकादमी के प्रवक्ता श्री बृजेश द्विवेदी ने किया। इस अवसर पर अकादमी के वरिष्ठ पदाधिकारी और मीडिया प्रभारी श्री हामिद खान, श्री भूपेंद्र सेठी, श्री विजय कुमार राय, डॉ. पुष्पा जोशी, सुश्री सरोज शर्मा, सुरेखा शर्मा, हेमा शर्मा,मंजीत कौर, राज भदौरिया, हिमानी कश्यप, मोहित अग्रवाल, राहुल कुमार झा और राहुल शर्मा का समारोह को सफल बनाने में विशेष योगदान रहा।

काव्य महोत्सव एवं शाम्भवी - पुस्तक लोकार्पण

हिंदुस्तानी भाषा अकादमी के तत्वाधान में दिनांक 22 मई 2016 को कवयित्री कविता शर्मा के काव्य संग्रह "शाम्भवी" का लोकार्पण तथा गीतों भरी शाम काव्योत्सव का आयोजन दिल्ली के हिंदी भवन में संपन्न हुआ | समारोह में मुख्य अतिथि साहित्य जगत के वरिष्ठ मर्मज्ञ डॉ लक्ष्मी शंकर वाजपेई के साथ विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रसिद्ध कवयित्री ममता किरण,गीत ऋषिका डॉ सीता सागर के साथ प्रसिद्ध योगाचार्य योगी अरुण तिवारी उपस्थित थे |

कार्यक्रम का शुभारम्भ डीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना से हुआ तत्पश्चात कविता शर्मा ने काव्य संग्रह "शाम्भवी" के महत्वपूर्ण बिंदुओं को उद्धरित किया | हिंदुस्तानी भाषा अकादमी के अध्यक्ष सुधाकर पाठक ने स्वागत उद्बोधन के दौरान अकादमी के गठन एवं गतिविधियों पर प्रकाश डाला | काव्योत्सव के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से आये कवियों ने अपनी मधुर रचनाओं से समां बांध दिया | सुप्रसिद्ध रचनाकार ममता किरण की ग़ज़लों पर भवन में उपस्थित जनसमुदाय मुग्ध हो गया | समारोह के अध्यक्ष डॉ लक्ष्मी शंकर वाजपेई ने हिंदी की वर्तमान स्थिति पर गंभीर विमर्श प्रस्तुत किया| योगी अरुण तिवारी ने कहा की विदेशों में प्रत्येक बच्चे को बिना मातृभाषा सीखे विद्यालय में प्रवेश नहीं मिल सकता | गीत ऋषिका डॉ सीता सागर के गीतों पर तालियों का झरना फूट पड़ा |

कार्यक्रम के दौरान अकादमी के सर्वश्री रामकिशोर उपाध्याय, डॉ किरण मिश्रा, हामिद खान, डॉ दमयंती शर्मा, डॉ पुष्पलता भट्ट, सुरेख शर्मा, सरोज शर्मा, भूपेंद्र सेठी, सागर समीप, शंभू ठाकुर, पुष्पा जोशी, रंजीता सिंह, अमरनाथ आकाश, राहुल कुमार झा के अलावा गणमान्य व्यक्तियों मैं सर्वश्री जयप्रकाश त्रिपाठी, समोद चरौरा, श्वेताभ पाठक, आशीष चौबे, अमित आनंद, निवेदिता झा, उर्मिला माधव, मीनाक्षी, बैरागी म्रत्युंजय, नीलू नीलपरी, पवन अरोरा, अरविन्द योगी, दीपक गोस्वामी, ओमप्रकाश प्रजापति, सुषमा सिंह, श्यामा अरोरा, निशि शर्मा, अनिमेष शर्मा, तरुणा मिश्रा, देवकांत त्रिपाठी, अनिल साकेतपुरी, पवन त्रिपाठी, बबली वशिष्ठ , सुरेंद्र शर्मा समेत उपस्थित रहे |

कार्यक्रम का सञ्चालन अकादमी के महासचिव डॉ पवन विजय ने एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रवक्ता बृजेश द्विवेदी ने किया |

विश्व पुस्तक मेला ( पुस्तक लोकार्पण एवम परिचर्चा )

विश्व पुस्तक मेले में 7-15 जनवरी तक प्रगति मैदान के हाल संख्या 12 मे अकादमी की ओर से पुस्तकों के लिए स्टाल लगाया गया जिसमें अकादमी प्रकाशन के अतिरिक्त अन्य लेखकों की पुस्तकों को रखने की व्यवस्था थी । स्टाल का समस्त कार्य श्री भूपेंद्र सेठी जी ने देखा और उसमें सहयोग किया श्री हामिद खान जी ने । 14 जनवरी को लेखक मंच पर "पुस्तक लोकार्पण एवं परिचर्चा: हिंदी की राष्ट्रीय स्वीकार्यता -चुनौतियां एवम् संभावनाएं" का आयोजन किया गया । साहित्यिक मित्रों से खचा-खच भरे पंडाल में तीन पुस्तकों का भव्य लोकार्पण हुआ - सुश्री सीमा सिंह द्वारा लिखित "विवेकानंद", डॉ अनीता सिंह का कविता संग्रह "कसक...बाकी है अभी" और सुश्री नीरजा कमलनी का बाल कविता संग्रह ",उमंग"। इसके साथ ही 'हिंदुस्तानी भाषा साहित्य समीक्षा सम्मान' के अंतर्गत प्रकाशित समीक्षा संग्रह 'शब्द गाथा' के चार समीक्षकों को भी सम्मानित किया गया - सुश्री सुनीता शानू, सुश्री वंदना गुप्ता, सुश्री तरुणा मिश्र और श्री प्रदीप मिश्र ।

इस समारोह में विशिष्ठ अतिथि के रूप में डॉ प्रेम जनमेजय जी, प्रोफेसर शरद नारायण खरे, डॉ धनेश द्विवेदी, श्री अनिल शर्मा मंच पर उपस्थित थे । अकादमी के अध्यक्ष श्री सुधाकर पाठक ने अपने उद्बोधन में पुस्तकों के रचनाकारों को शुभकामनायें दीं और अकादमी के गठन, एक वर्ष के अकादमी के कार्यों सहित उपस्थित साहित्यिक मित्रों को "हिंदी की राष्ट्ररीय स्वीकार्यता अभियान' से जुड़ने की अपील की । अकादमी के वरिष्ठ पदाधिकारियों श्री भूपेंद्र सेठी, श्री हामिद खान, विजय कुमार राय, सुश्री सुरेखा शर्मा, डॉ तारा गुप्ता, सारोज शर्मा, अमर नाथ गिरी, विजय शर्मा, को उनके सराहनीय कार्यों और अकादमी के उद्देश्यों की प्राप्ति में सहयोग के लिए सम्मानित किया गया । इसके अतिरिक्त समारोह में उपस्थित सहित्यिक मित्रों श्री समौद सिंह चारोरा, सुश्री कुसुम शर्मा, निशा गुप्ता, मीना अरोड़ा, अनिल मीत, गीता पंडित, कुसुम पालीवाल,केदारनाथ शब्द मसीहा, पवन अरोरा, प्रवीण कुमार, डॉ वीणा मित्तल, श्री त्रिभवन कौल, मनोज कामदेव, डॉ वीणा मित्तल, राजेंद्र शर्मा, सीमा श्रोत्रिय, तुलिका सेठ, देव नारायण शर्मा, सहित अन्य साहित्यकारों को अकादमी की ओर से सम्मानित किया गया । कार्यक्रम का सफल सञ्चालन अकादमी के प्रवक्ता श्री बृजेश द्विवेदी ने किया ।

सर्व भाषा काव्य महोत्सव

"हिंदुस्तानी भाषा अकादमी"की ओर से 19 नवंबर 2016 को शाम 2 बजे से "गाँधी शांति प्रतिष्ठान" में 'सर्व भाषा काव्य महोत्सव' का आयोजन किया गया । काव्योत्सव में मुख्य अतिथि डॉ लक्ष्मी शंकर बाजपेई थे और अध्यक्षता डॉ धनञ्जय सिंह जी ने की । विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार सुश्री सविता चड्ढा, प्रसिद्द कवयित्री डॉ सीता सागर और ममता किरण जी, श्री प्रेम भारद्वाज 'ज्ञानभिक्षु', डॉ रवि शर्मा, डॉ धनेश द्विवेदी थे । लगभग 4-5 घंटे चले इस काव्योत्सव में 'हिंदुस्तानी भाषा साहित्य समीक्षा सम्मान" से सम्मानित सभी समीक्षकों ने तो काव्य पाठ किया ही साथ ही दिल्ली और आसपास से आये कई वरिष्ठ और युवा कवियों ने अपने सुमधुर काव्य पाठ से सबका मन मोह लिया जिनमें श्री प्रेम विहारी मिश्र, श्री अजय अज्ञात, सुश्री वसुधा कनुप्रिया, श्री राम लोचन, श्री मुनीश तन्हां, सुश्री काजल चौबे, दास अरूही, शरद कुमार सक्सेना, संजीव बर्मन, सुश्री सुभदा वाजपेयी, मंजू वशिष्ठ, अजय अक्स आदि थे । कार्यक्रम की समाप्ति डॉ सीता सागर जी के मधुर गीत से हुई । इस कार्यक्रम को दिल्ली और बाहर से आये सभी लोगों ने बहुत सराहा ।

"हिंदुस्तानी भाषा भारती" त्रैमासिक पत्रिका का लोकार्पण

अकादमी की त्रैमासिक पत्रिका "हिंदुस्तानी भाषा भारती" के अंक का भव्य लोकार्पण 19 नवंबर, 2016, गाँधी शांति प्रतिष्ठान में हुआ। मंच पर पूर्व केंद्रीय मंत्री, सांसद और संसदीय राजभाषा समिति के उपाध्यक्ष डॉ सत्यनारायण जटिया जी, पूर्व सांसद एवम् वरिष्ठ साहित्यकार डॉ प्रभा ठाकुर, श्री प्रह्लाद सिंह पटेल, सांसद, प्रसिद्द हास्य कवि श्री सुरेंद्र शर्मा और देश की सुप्रसिद्ध कवियत्री डॉ सीता सागर, श्री विजय कुमार शर्मा , सुश्री सुषमा सिंह और देश भर से पधारे सम्मानित साहित्यकार ।

" लखनऊ पुस्तक मेला "

'हिंदुस्तानी भाषा अकादमी' की ओर से 9 अप्रैल, 2017 को 'लखनऊ पुस्तक मेले' में 'पुस्तक लोकार्पण, काव्योत्सव एवम् परिचर्चा :हिंदी की चुनौतियाँ एवं संभावनाएं'' समारोह का भव्य आयोजन हुआ । समारोह में मंचासीन अतिथियों में अरुणाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल श्री माताप्रसाद जी, डॉ धनेश द्विवेदी, साहित्यकार और पत्रकार डॉ पद्मकान्त शर्मा प्रभात, नार्वे के प्रवासी साहित्यकार डॉ सुरेश चंद शुक्ल, वरिष्ठ पत्रकार-व्यंगकार श्री अनूप श्रीवास्तव, सेल्स टैक्स कमिशनर श्री बजरंगी यादव, श्री प्रवीण कुमार सिंह सहित कानपुर/लखनऊ के वरिष्ठ सुश्री निवेदिता श्रीवास्तव, संध्या सिंह, डॉ कुसुम शिकला, साजिदा सबा, अन्नपूर्णा बाजपेई 'अंजु', मीना पाठक, मधु प्रधान, रश्मि कुलश्रेष्ठ, रंजना जोशी, कुमार तरल, शैलेंद्र संदीप सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार और कवि उपस्थित थे । अकादमी के अध्यक्ष सुधाकर पाठक ने अकादमी के उद्देश्यों और कार्यों की की विस्तार से चर्चा की और उपस्थित साहित्यप्रेमियों से अकादमी से जुड़ने की अपील की । समारोह में अकादमी की त्रैमासिक पत्रिका 'हिंदुस्तानी भाषा भारती'के अंक का लोकार्पण भी हुआ ।

कॉर्यक्रम का सफल संचालन श्री बृजेश द्विवेदी ने किया । इस भव्य समारोह को अकादमी के वरिष्ठ पदाधिकारी सुश्री सरोज शर्मा, सुरेखा शर्मा, सीमा सिंह, डॉ बीना राघव, कुमारी वंदना, सर्वश्री हामिद खान , विजय कुमार राय, अमर नाथ गिरि ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति और प्रयासों से सफल बनाया ।

वैश्विक साहित्य संस्कृति महोत्सव

बाली (इंडोनेशिया) में 12 दिसम्बर, 2016 को "वैश्विक साहित्य संस्कृति महोत्सव' में हुए भव्य समारोह में हिंदुस्तानी भाषा अकादमी के अध्यक्ष श्री सुधाकर पाठक को उनके भारतीय भाषाओं के प्रचार-प्रसार के माध्यम से हिंदी की राष्ट्रीय स्वीकार्यता के लिए किये जा रहे प्रयासों और साहित्य संगठन के लिए "भारत भास्कर अवार्ड 2016" से सम्मानित किया गया । इसमें भारत के विभिन्न प्रान्तों से पधारे वरिष्ठ साहित्यकारों की उपस्थित में सम्मान पत्र, सम्मान राशि 11000/- रुपये, स्मृति चिन्ह और अंग वस्त्रंम भेंट किया गया । इस अवसर पर अकादमी की त्रैमासिक पत्रिका "हिंदुस्तानी भाषा भारती" के अंक और अकादमी प्रकाशन "शब्द गाथा" का विमोचन भी हुआ । समारोह में डॉ प्रेम जनमेजय, डॉ लालित्य ललित, डॉ सुधीर शर्मा, डॉ हरिसुमन विष्ट, छत्तीसगढ़ से मंत्री डॉ गणेश कौशिक, श्री प्रत्यूष गुलेरी, सुश्री कुसुम शर्मा, डॉ प्रमोद शर्मा, डॉ गिरीश पंकज, संदीप शर्मा, डॉ मृणालिका ओझा सहित देश के कई वरिष्ठ साहित्यकार उपस्थित थे । समारोह में विशिष्ठ अतिथि के रूप में अपने संबोधन में श्री सुधाकर पाठक ने अकादमी के गठन के उद्देश्यों और कार्यों की विस्तार से चर्चा की । उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं को साथ लिए बिना हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाना बहुत कठिन होगा। इसके लिए उन्होंने अलग-अलग राज्यों से आये साहित्यकारों से अकादमी की हिंदी के "राष्ट्रीय स्वीकार्यता अभियान" से जुड़ने का अनुरोध किया । श्री पाठक ने युवाओं को साहित्य और भाषाओँ के प्रचार -प्रसार से जोड़ने का भी अनुरोध किया । उन्होंने अकादमी के पिछली योजनाओं जैसे समीक्षा सम्मान, काव्य प्रतिभा खोज, सार्थक साहित्य का प्रकाशन की चर्चा सहित अगामी कार्यक्रमों में भाषा के क्षेत्र में कुछ ठोस और गंभीर प्रयासों किए जाने की बात भी की । समारोह में उपस्थित सभी साहित्यकारों ने अकादमी के गंभीर प्रयासों की प्रसंशा की और यथा संभव सहयोग का भरोसा भी दिलाया ।

हिंदुस्तानी भाषा साहित्य समीक्षा सम्मान-2015

नव रचनाकारों के लिए जटिल समझी जाने वाली समीक्षा विधा से अवगत कराने और समीक्षा लेखन को प्रोत्साहित करने के उद्द्येश्य से हिंदुस्तानी भाषा अकादमी की ओर से "हिंदुस्तानी भाषा साहित्य समीक्षा सम्मान" योजना की शुरुआत की गई है । हिंदी साहित्य के क्षेत्र में किसी एक पुस्तक पर पूरे देश से प्राप्त समीक्षाओं को पुस्तक रूप में प्रकाशित करने और श्रेष्ठ समीक्षकों को सम्मानित करने का पुनीत कार्य भी अकादमी कर रही है । इसी में क्रम में अकादमी द्वारा वाणी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित सुधाकर पाठक के कविता संग्रह "जिंदगी....कुछ यूँ ही" पर प्राप्त देश के श्रेष्ठ 50 समीक्षकों की समीक्षाओं का संकलन "शब्द गाथा" का प्रकाशन और लोकार्पण किया गया है। हिंदी साहित्य जगत में यह एक अनूठा प्रयोग माना जा रहा है । वरिष्ठ साहित्यकार डॉ नामवर सिंह जी ने उसे अद्भुत प्रयोग कहा है, वहीँ वरिष्ठ साहित्यकार डॉ हरीश नवल और डॉ ओम निश्छल ने पुस्तक में भूमिका लिखी है और इस पूरे आयोजन को ही बेमिसाल कहा है । संसदीय राजभाषा समिति के उपाध्यक्ष और राज्यसभा सांसद डॉ सत्यनारायण जटिया जी ने पुस्तक लोकार्पण के अवसर पर कहा कि यह पुस्तक समीक्षा के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत करेगी । इस अवसर पर प्रसिद्द हास्य कवि सुरेंद्र शर्मा जी, शिक्षाविद और साहित्यकार डॉ सीता सागर, डॉ प्रभा ठाकुर और डॉ लक्ष्मीशंकर बाजपेई सहित उपस्थित वरिष्ठ साहित्यकारों ने इस योजना की प्रशंसा की । निश्चित रूप से यह एक अनमोल पुस्तक है और संग्रहणीय है। इससे न केवल साहित्य के विद्यार्थिओं को समीक्षा विधा को समझने का अवसर मिलेगा बल्कि यह जानना भी रोचक होगा कि किसी एक पुस्तक या विषय पर अलग अलग समीक्षकों की सोच क्या है ? नव समीक्षकों सहित वरिष्ठ साहित्य प्रेमियों से अनुरोध है कि इस पुस्तक और योजना पर अपने बहुमूल्य मत से अवगत अवश्य कराएं ।

मुशायरा-शिखर संस्था

'शिखर संस्था' (महिलाओं और बच्चों के लिए कार्यरत) की ओर से बुराड़ी, दिल्ली में सुश्री संध्या शर्मा के संयोजन में एक बेहतरीन मुशायरे का आयोजन किया गया जिसमें सर्वश्री भारत भूषण आर्य, अज़हर अल्बी, अज़हर इक़बाल, राजीव रियाज़, अनवर कमाल, पूनम यादव, अस्तित्व अंकुर, खुशबू सक्सेना और कुमारी वंदना ने बेहतरीन रचनाओं से श्रोताओं का मन जीत लिया । इस मुशायरे में हिंदुस्तानी भाषा अकादमी की ओर से अकादमी की सलाहकार सुश्री सरोज शर्मा जी और प्रवक्ता श्री भूपेंद्र कुमार सेठी जी विशिष्ठ अतिथि के रूप में सम्मलित हुए । मुशायरे की अध्यक्षता अकादमी के अध्यक्ष श्री सुधाकर पाठक ने की और मुशायरे की समाप्ति पर सभी आमंत्रित शायरों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया ।

स्पंदन-श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स, दिल्ली विश्वविद्यालय

श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स, दिल्ली विश्वविद्यालय के सभागार में 'हिंदी साहित्य सभा' की ओर से तीन दिवसीय 'स्पंदन' समारोह के दूसरे दिन कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया । कार्यक्रम के प्रथम सत्र में विख्यात कवि और दूरदर्शन कलाकार श्री शैलेश लोढ़ा (तारक मेहता का उल्टा चश्मा से प्रसिद्द) ने युवाओं से खचाखच भरे सभागार में हिंदी और भारतीय भाषाओं पर एक सारगर्भित वक्तव्य दिया और उन्हें हिंदी के प्रयोग के लिए प्रोत्साहित किया । दूसरे सत्र में कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि श्री राजेंद्र राजा ने की और विशिष्ठ अतिथि के रूप में हिंदुस्तानी भाषा अकादमी के अध्यक्ष श्री सुधाकर पाठक और सानिध्य में हिंदी अकादमी, दिल्ली सरकार के सचिव डॉ जीत राम भट्ट थे । मंचासीन कवियों में युवा कवि और अकादमी के प्रवक्ता श्री बृजेश द्विवेदी, श्री विनय विनम्र, श्री शम्भु शिखर और सुश्री प्रीति विश्वास थीं । इस अवसर पर अकादमी के सलाहकार और मीडिया प्रमुख श्री हामिद खान और पत्रिका प्रसार प्रभारी और प्रवक्ता श्री भूपेंद्र सेठी जी की गरिमामयी उपस्थिति रही । हिंदी साहित्य सभा के मार्गदर्शक और हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ रवि शर्मा ने समारोह के आयोजन पर प्रकाश डाला और कवि सम्मेलन का सञ्चालन भी किया । अकादमी के अध्यक्ष श्री सुधाकर पाठक ने हिंदी साहित्य सभा को इस सफल आयोजन की शुभकामनायें दीं और साथ में भविष्य में होने वाले इस तरह के आयोजनों में अपने सहयोग की बात भी की ।

दावत-ए-सुख़न

हिंदुस्तानी भाषा अकादमी के सह -आयोजन में गज़ल और गीतों को समर्पित एक बेहतरीन कॉर्यक्रम 'दावत-ए-सुख़न' का आयोजन दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी के अमीर खुसरो सभगार में 11 फरवरी, 2017 (रविवार) को हुआ जिसमें देश के नामचीन कवियो और शायरों ने अपने रचना पाठ से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया । इस शानदार आयोजन में हिंदुस्तानी भाषा अकादमी भी सहआयोजक थी । हिंदुस्तानी भाषा अकादमी की ओर से अकादमी के अध्यक्ष श्री सुधाकर पाठक ने देश के वरिष्ठ शायर आदरणीय मंगल नसीम साहब को शाल और पुष्पगुच्छ से स्वागत किया । अकदमी के मीडिया प्रभारी श्री हामिद खान, संगठन सचिव सुश्री सरोज शर्मा, साहित्यिक सलाहकार श्री विजय कुमार राय, साहित्यिक सचिव सुश्री रंजीता राय, विधि सलाहकार श्री अमरनाथ गिरी और पत्रिका प्रसार प्रभारी श्री भूपेंद्र सेठी सम्मलित हुए । इस सफल आयोजन के लिए कॉर्यक्रम के सूत्रधार श्री मनीष मधुकर, सुश्री सुशीला शिवराण, विजय स्वर्णकार, रसिक गुप्ता, अस्तित्व 'अंकुर', मनोज 'बेताब', अजय 'अक्स' और पूरी टीम को हार्दिक बधाई ।