हिन्दुस्तानी भाषा अकादमी में आपका स्वागत है |


सुधाकर पाठक (अध्यक्ष)

सन्देश

हिन्दुस्तानी भाषा अकादमी का संदेश:

हिंदी भाषा सहित देश की लगभग सभी भाषाओँ के लिए कार्य करने वाली बहुत सी सरकारी और गैर-सरकारी संस्थायें लंबे समय से अपने-अपने स्तर उनके प्रचार-प्रसार और उत्थान के लिए कार्य कर रही है | हमने पूरी गंभीरता से इसका अध्ययन किया और यह तथ्य निकला कि इन संस्थाओं में आपसी समन्वय का अभाव है | इसका नकारात्मक प्रभाव यह हुआ कि कोई भी भारतीय भाषा देश की संपर्क भाषा के रूप में विकसित नहीं हो पाई और उसका स्थान अंग्रेजी भाषा ने ले लिया |

आज जरुरत एक ऐसे मंच की है जहां पर देश के सभी भाषाएँ एक दूसरे का हाथ थामे एक जगह पर खड़ी दिखाई दें | इसी मुख्य उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए राष्ट्र हित में हमने 'हिन्दुस्तानी भाषा अकादमी' का गठन किया गया है | इस संस्था में सम्मलित प्रत्येक सदस्य लंबे समय से विभिन्न संस्थाओं/मंचों के माध्यम से देश की अलग-अलग भाषाओँ पर अपने-अपने स्तर पर कार्य करते रहे हैं | हमारे बहुत से साथी हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाएं जाने के लिए लंबे समय से विभिन्न आंदोलनों के माध्यम से सरकार का दवाब बनाने की कोशिश भी कर रहे है, लेकिन हमारा मत है कि किसी भी भाषा को राष्ट्र भाषा बनाए जाने के लिए यह प्रयास नाकाफी है और हमें इसके लिए जमीनी स्तर पर ठोस कार्य करना होगा |

सर्वप्रथम आवश्यकता इस बात की है कि देश की जो भी राष्ट्रभाषा बने उसकी स्वीकार्यता पूरे राष्ट्र में होने चाहिए और इसके लिए सर्वप्रथम उसे देश की सम्पर्क भाषा बनना होगा | जिस प्रकार मात्र पत्तों पर पानी डालने से किसी पेड़ की जड़ें मजबूत नहीं हो सकती, ठीक उसी तरह मात्र आन्दोलन से कुछ होने वाला नहीं है | हम अपने उद्देश्य में तभी सफल हो सकते है जब समस्याओं को उठाने के साथ-साथ उनका समाधान के साथ अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे | आज आवश्यकता है कि क्षेत्रीय भाषाओँ व सर्वमान बोलियों का परिक्षण, संवर्धन और विकास किया जाएं | उनसे हिन्दी के शब्द ग्रहण के लिए तंत्र का निर्माण किया जाए और तकनीकी शब्दावली विकसित की जाए | हिंदी सहित सभी प्रांतीय भाषाओँ के साहित्य का अनुवाद किया जाए और मानक शब्द कोष का निर्माण किया जाए | इससे भारतीय भाषाओँ में आपसी सामंजस्य, सहिष्णुता, सम्मान और सौहार्द बढ़ेगा और एक दूसरे के साहित्य को पढने और समझने का अवसर मिलेगा | मेरा मानना है इन सब कार्यो से संपर्क भाषा के रूप में हिंदी की स्वीकृति बढ़ेगी, साथ ही सरकार को सहयोग और भाषाई सौहाद्र को बढ़ाने में भी मदद मिलेगी |

हमें इस बात को मानने में कोई संकोच नहीं है कि हिंदी पर कोई ठोस कार्य न होने के कारण और भाषा के नाम पर होने वाले आंदोलनों और क्रांतियों के कारण भी हिन्दी भाषा के प्रति अन्य भाषाओं और अहिंदी भाषी प्रान्तों में इसकी अस्वीकरता बढ़ी है | हमारा मत है कि भाषाई कट्टरता से मात्र राजनीति तो कि जा सकती है लेकिन इसकी स्वीकारता नहीं कराई जा सकती है | सम्पूर्ण भारत के भौगोलिक और राजनितिक परिवेश को देखते हुए किसी भी भाषा की पूरे राष्ट्र में समुचित स्वीकार्यता के बिना राष्ट्रभाषा बना पाना संभव नहीं दिखता है, अगर इस तरह का कोई भी प्रयास किया जाता है तो जिस प्रकार भारत जाति-धर्म और राजनितिक रूप से बंटा दिखता है, आने वाले समय में भाषा के नाम पर भी इसी प्रकार का खतरा सामने आ सकता है | निसंदेह, हिंदी आज भारत में सबसे ज्यादा बोली-समझी जाने वाली भाषा है, बस जरुरत इस बात की है कि इसकी स्वीकार्यता सम्पूर्ण राष्ट्र में हो और यह अग्रेजी के स्थान पर भारत की संपर्क भाषा बने | जिस दिन हम इसे संपर्क भाषा बनाने में सफल हो गए तो इसे देश की राष्ट्र भाषा बनने से कोई नहीं रोक पायेगा और इसमे प्रांतीय भाषाओँ का सहयोग भी मिलेगा | देश की विभिन्न भाषाओँ को एक धागे में पिरोकर भारत को विश्व में सर्वोच्च शिखर पर पहुँचाना ही ' हिन्दुस्तानी भाषा अकादमी ' का एक मात्र लक्ष्य है |

एक दृश्य

जिस देश के पास अपनी २२ संवैधानिक भाषाएँ हों, जहां पर कोस कोस पे पानी और चार कोस पे बानी की बात कही जाती है, जहां १७९ भाषाओं ५४४ बोलिया हैं बावजूद इसके देश का राजकाज सात समंदर पार एक अदने से देश की भाषा में हो रहा है , इस तथ्य पर मंथन होना चाहिए | भारतीय भाषायें अभी भी खुले आकाश में सांस लेने की बाट जोह रही हैं | हिन्दी को इसके वास्तविक स्थान पर स्थापित करने के लिए सर्वप्रथम यह आवश्यक है कि इसकी सर्व स्वीकार्यता हो | यह स्वीकार्यता आंदोलनों या क्रांतियों से नही आने वाला है | इसके लिए हिन्दी को रोजगारपरक भाषा के रूप में विकसित करना होगा साथ ही अनुवादों और मानकीकरण के जरिए इसे और समृद्धता और परिपुष्टता की ओर ले जाना होगा |

हिन्दी भाषा सहित देश की लगभग सभी भाषाओँ के लिए कार्य करने वाली बहुत सी सरकारी और गैर- सरकारी संस्थायें लंबे समय से अपने-अपने स्तर उनके प्रचार-प्रसार और उत्थान के लिए कार्य कर रही है किन्तु इन संस्थाओं में आपसी समन्वय का अभाव है | इसी अभाव को दूर करने के लिए हिन्दुस्तानी भाषा अकादमी का गठन किया गया है |

हिन्दुस्तानी भाषा अकादमी भारत की ऐसी संस्था है जो हिन्दी समेत अभी हिन्दुस्तानी भाषाओं के विकास एवं प्रचार प्रसार के लिए निरंतर कार्य कर रही है | संस्था एक एक हिन्दुस्तानी भाषा को उसका दर्जा व उनका समुचित अधिकार दिलवाने हेतु कटिबद्ध है हिन्दुस्तानी भाषा अकादमी देश के विभिन्न जिम्मेदार व्यक्तियों और अधिकरणों के साथ संवाद स्थापित कर रही है ताकि हिन्दुस्तानी भाषाओं के रास्ते में आई रुकावटो दूर कर इसे वैश्विक चुनौतियों के लिए तैयार किया जाए |


हिन्दी भाषा सहित देश की लगभग सभी भाषाओँ के लिए कार्य करने वाली बहुत सी सरकारी और गैर- सरकारी संस्थायें लंबे समय से अपने-अपने स्तर उनके प्रचार-प्रसार और उत्थान के लिए कार्य कर रही है किन्तु इन संस्थाओं में आपसी समन्वय का अभाव है | इसी अभाव को दूर करने के लिए हिन्दुस्तानी भाषा अकादमी का गठन किया गया है |

हिन्दुस्तानी भाषा अकादमी भारत की ऐसी संस्था है जो हिन्दी समेत अभी हिन्दुस्तानी भाषाओं के विकास एवं प्रचार प्रसार के लिए निरंतर कार्य कर रही है | संस्था एक एक हिन्दुस्तानी भाषा को उसका दर्जा व उनका समुचित अधिकार दिलवाने हेतु कटिबद्ध है हिन्दुस्तानी भाषा अकादमी देश के विभिन्न जिम्मेदार व्यक्तियों और अधिकरणों के साथ संवाद स्थापित कर रही है ताकि हिन्दुस्तानी भाषाओं के रास्ते में आई रुकावटो दूर कर इसे वैश्विक चुनौतियों के लिए तैयार किया जाए |